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यादें

  आज याद तेरी फिर आई  जब उठकर सुबह ली मैंने अंगड़ाई  जब नहा कर मैंने ऊपरवाले की ज्योति जगाई  जब पढ़ा आज का पहला पन्ना  तब हवा के झोंके सी तेरी याद आयी ।  जब माँ  ने प्यार से रोटी  खिलाई  जब बाप ने गर्व से पीठ थपथपाई ।  जब आज अनजानों ने भी बातें बताई  इन सब में तू काफी याद आई ।।  मेरी रूह में, मेरे जहन में मेरे इश्क-ए -फरेब के वहम में , तेरी यादों का एक पिटारा है  क्या वफ़ा की चाबी है तेरे जहन में ?  यादों का सिलसिला जारी रहेगा  तेरा न आना भी भारी रहेगा  लिखूँगा जब जब यादें आएंगे तेरी  इन यादों के साथ सफर मेरा सुहाना हजारी रहेगा ।।                                                                                                         - शिनाख्त...

bold इश्क

“कभी-कभी इश्क़ सिर्फ़ रूह में नहीं, जिस्म की हर नस में भी बोलता है। ये कविता उसी आवाज़ की है।” खा जाऊँ तुझे पूरा का पूरा, ना रहे कोई ख़्वाब अधूरा। होठों पे रख दूँ अपने होठ, तेरी साँसों को भर लूँ अंदर तक, तु मुझमें डूबे, और मैं तेरा जिस्म चखूँ— मेरे इश्क़ के ख़ज़ाने का नशा पी ले। ना रुक तू मुझसे लिपटने में, ना मैं होश संभालूँ। दो लताएँ जैसे लिपट जाती हैं एक-दूसरे को, वैसे हम घुल जाएँ, बीच में ना रहे कोई फ़ासला। तेरे उभारों को निचोड़ता रहूँ, तेरी गर्दन पे निशान छोड़ता रहूँ, हाथों से तेरी कमर को खींच कर तोड़ लूँ अपनी गोद में। और तू सिर्फ़ भागती न रहे, मैं भी रुकता न रहूँ। उँगलियों का एहसास, सीने से चिपक कर ख़ुद को खोना, और तेरे जिस्म का स्वाद लेना— यही मेरा आज का नाश्ता है। आज तेरे स्वाद से भरूँगा पेट, तेरे पसीने से नशा पीऊँगा। तू भागेगी नहीं, और मैं रुकूँगा भी नहीं।                                        - शिनाख्त 

आनंद - HOPE

जो जीता है , वो मरेगा  जो रोता है , वो हसेगा ।  ज़िंदगी से ज्यादा शोर करते हैं मौत के जाम  मगर मौत के बाद भी सबकी यादों में रहता हमारा नाम ।   और जब कोई करेगा हमें याद  हम फिर से जियेंगे उसी के साथ ।। जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह, जिसे ना आप बदल सकते हैं, ना मैं। हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिसकी डोर ऊपर वाले के हाथ बंधी है। कब, कौन, कैसे उठेगा, ये कोई नहीं जानता..!