उससे मोहब्बत है हमको, उसे मोहब्बत नहीं हमसे, वो चाँद सी खूबसूरत है, हम मारे हैं न जाने किस ग़म के, आज भी वो लगती हैं जवान, हम भी रह गए बस ख़ुद के, दिमाग में आना मुश्किल है तुम्हारा, नहीं निकाल पाएँगे तुम्हें दिल से, तुम कैसी भी रही, मुकम्मल रही ख़ुद से, बस हमारी न हो पाईं तुम, यही शिकायत रही तुमसे।