मेरा प्यार और लोग
गले लगाने को न मिली इतने सालों में मोहब्बत रही तो बस मेरे ही ख्यालों में मुझे तो मिले बस कुछ पसंदीदा लोग पसंद की शराब कहां मिली है प्यालों में दिल लगाने की तो बात दूर की मैं रहता हूँ जैसे कैदी रहते हवालों में नफ़रत है अब उन सब चीजों से जो लौट कर ले जाते हैं तेरे खयालों में ये कैसे लोग हैं अजीब मेरे आस पास अपना कुछ नहीं है इनकी मिसालों में हमेशा करते रहते औरों की बात खुदसे खुद को डुबाते औरों के सवालों में कुछ रह जाते हैं तन्हा हमारे जैसे गुजरती है ज़िंदगी गुजरे सालों में आधा मना कहना नहीं चाहता कुछ आधा मन बोलना चाहता है उजालों में मैं करूँ भी कब तक खुद से पहल तू भी कुछ कहे अपने इन गालों में - शिनाख्त