एक इश्क़ अधूरा छोड़ दिया, बिखरा हुआ दिल फिर तोड़ दिया। वो रही जब से दूर यादों में, हमने भी पीना छोड़ दिया। शायरी माँग रही थी लहू मेरा, मैंने भी दिल पूरा निचोड़ दिया। अब उसकी गली के क्या मायने बचे, हमने मंज़िल का रस्ता मोड़ दिया। जब से तू गई मेरे ख़्वाब लेकर, जाना, मैंने सोना छोड़ दिया। पत्थर का ज़माना हुआ बेवफ़ाई में, मैंने दिल का शीशा तोड़ दिया। अब ख़ाक ही रह गई है पास मेरे, दिल का आख़िरी पंछी भी मरोड़ दिया। – शिनाख्त