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इश्क़ बाद में

छोड़ दिया है दिल का ज़ख्म वक़्त पे देख लेंगे हम जैसा होगा प्यार, देखा जाएगा ना मिला तो क्या है ग़म ज़िंदगी बनाएंगे अच्छी वक़्त के ग़ुलाम नहीं सनम काम में कर लिया दिल पत्थर अब चाहे रूठ जाए सनम और भी मिल जाएंगे आगे जब संभल जाएंगे क़दम                                   – शिनाख्त 

career first, dating later

i guess its one of my toughest decision.  maybe one of stupidest decision don't seek any love before career. so...not approaching any girls... talking to them only for formal or official work and nothing else. .. career ka itna obsession nhi hai, but career doob jayega , pyaar find karne ke chakkar main  shwetabh video 1 shwetabh video 2 jo milna hai , wo baad main bhi mil jayega..baht time hai aur bahut log hain aur abhi waale long term rahenge ye main decide nhi kar skta , ye wo decide karenge Love has no age limit.

Ego

I have an ego side... Fuck love , let me build my empire  Let me tell this fucking world who I am. For sometime, let be me myself great as I want to be . And this king can't bow down to any queen for sometime . Let queen be bow down to me now ..as I have too much ego. I will be at the top...and fuck all things now.

पुराने ज़ख्म

भरे हुए ज़ख्म आज भी दहकते हैं, यूँ तो पत्थर हुआ दिल, पर हम आज भी बहकते हैं। और मैंने हँसते-हँसते जाने दिया था उसे, मेरे गरम अश्क आज भी चहकते हैं। सोचा था माफ़ करने पर भूल जाऊँगा उसे, ये क्षमा के फूल कुचलने पर भी महकते हैं। दिल तो दिल है, डरता है ठोकर खाने से, ये तो हिम्मत है, फिर दरिया में उतरते हैं। इश्क़ के दरिया में डूबने में डर कैसा, ये तो मेरे जज़्बात हैं जो साहिलों से सिहरते हैं। अब जिसको रहना हो, वो वहाँ रहे, हम भी अब खुद में ही ठहरते हैं।                                              – शिनाख्त 

good life lately

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औरों का नजरिया

काँटे भी नहीं चुभते, इतनी मोटी खाल हुई दुनिया की हर ठोकर अब जैसे बेहाल हुई बातें सबकी चुभती हैं, ये सच मैंने माना है अपने जब कुछ कह जाएँ, रूह तलक बवाल हुई राहों में काँटे थे इतने, चलना भी दुश्वार हुआ फिर भी लोगों को हममें बस कमियाँ बेहिसाब हुईं दुनिया जीतोगे तुम सिकंदर जैसे बनकर अपने ही ना जीत सकोगे तो फिर ये जीत हार हुई घर की मुर्गी दाल बराबर, कहते सब आसान बहुत सोचा है कि उस मुर्गी की क्या गलत बात हुई ना तारीफ़ों में खो जाना, ना शिकवों में जल जाना काम पे ध्यान रखा जिसने, उसकी ही पहचान हुई ये बातें भी धुंधलाएँगी, ये पल भी गुज़र जाएगा वक़्त के आगे हर गहरी तकलीफ़ थकान हुई औरों का क्या है, वो तो अपना चश्मा लेकर चलते हैं खुद को खो बैठे जो इंसाँ, बस उसकी ही हार हुई                                                                      - शिनाख्त 

Log kya kahenge...if I fail

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