एक शख्स ने पूछा, "प्यार से क्यों डरते हो?" उसी ने फिर पूछा, "उन पर इतना क्यों मरते हो?" मैंने मुस्कुरा कर कहा, "जनाब, कमाल करते हो… आप भी इस प्यार की दुनिया को अब तक न समझते हो।" जिसमें मौत का डर न हो, वो प्यार ही क्या… जिसमें बर्बादी का डर न हो, वो यार ही क्या… मैं और प्यार, एक साथ रह नहीं सकते, कह दें सब कुछ दुनिया से, पर उनसे कुछ कह नहीं सकते… इसलिए डरता हूँ प्यार से, और अकेला रहता हूँ, कोई डर नहीं है आपसे, इसलिए आपसे सब कहता हूँ… खैर, ढूंढ लेंगे हम भी सागर को एक ही कतरे से, मौत को पहचान लेंगे दूर से पहले ही खतरे से… जो हमारे लिए न हो, उसे छोड़ने में देर न लगाएंगे, खुद से अलग रख देंगे उसे, जो बस सहारे के लिए आएंगे… अब इसी गुमान में रहता हूँ, कि अभी काम बहुत है, नाम बनाना अभी बाकी है, और बोतल में जाम बहुत है… और सपने भी हजार चाहिए… एक इश्क से नहीं, अब मुझे हद से ज्यादा आराम चाहिए। ... शिनाख्त