समय

बस समय नहीं है मेरे पास,

काम की व्यस्तता है मेरे साथ।

क्या ही रखूँ किसी से आस,

लगता बुरा जब महीनों बाद होती बात।


रिश्ते माँगते हैं समय,

जैसे पौधा माँगे पानी।

मैं कहाँ से दे दूँ समय,

जब सूखी ही है मेरी कहानी।


लेकिन मैं क्या ही दूँगा समय,

जब खुद पर ही नहीं लगाऊँगा।

अच्छे से बुरा बन जाएगा मेरा समय,

अगर खुद के लिए ही नहीं बचाऊँगा।

                                                     - शिनाख्त 


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