मैं तुझे याद आऊँगा

जब दिन थक कर ढल जाएगा

जब रात शहर को अपने अंदर समा लेगी

जब पेड़ सो जाएँगे

जब सब अँधेरे में खो जाएँगे

मैं तुझे याद आऊँगा


जब हम बात नहीं किया करेंगे

जब हम अलग–अलग जिया करेंगे

जब तू उदास हुआ करेगी

जब तू यूंही बुझा करेगी

मैं तुझे याद आऊँगा


जब तू भी किसी का इंतज़ार नहीं करेगी

जब दिन तेरा कटेगा नहीं

जब तू खुशी में दुखी होगी 

जब तुझे चाँद भाएगा नहीं 

मैं तुझे याद आऊँगा


जब तेरी आँखें भीगेंगी 

जब तू खुल कर हंसना चाहेगी 

जब तू सुकून पाना चाहेगी 

जब तू खुल कर रोना चाहेगी 

मैं तुझे याद आऊंगा 


जब तेरी सबसे लड़ाई हो जाएगी 

जब तेरा काजल बह जाएगा 

जब तुझे किसी की कमी महसूस होगी 

जब तुझे कोई नहीं समझ नहीं पाएगा 

मैं तुझे याद आऊंगा 

                         

जब तुझे हंसता हुआ कोई लड़का दिखेगा 

जब कोई बहुत दिल से बोलता दिखेगा 

जब कोई खुल के जीता दिखेगा 

मैं तुझे बहुत याद आऊंगा 


मुझे तो तू हमेशा याद आती है

अच्छा है कि तुझे मेरी याद नहीं आती है 

काश ऐसा वक़्त कभी न आए

जब मैं तुझे याद आऊँ

फिर भी, मैं चाहता हूँ

कि कभी तो

मैं तुझे याद आऊँ

                             – शिनाख्त

Comments

Popular posts from this blog

A POOL OF SMALL WINS

Unfinished shorts

Current thoughts