एक कत्ल की कहानी
एक कहानी सुनाता हूँ। थोड़ा ध्यान देना, अपने राज़ बताता हूँ। यह एक कत्ल की कहानी है। अंदर एक पुराना शख़्स रहता था, उसका नाम था "दिल"। बेचारा, उसकी यही कहानी है। बचपन से उसे कुछ भी मिला नहीं। वह बंजारों की तरह भटकता रहता था, और थोड़ा डरपोक भी था। जब दिल ने इस दुनिया में पहली साँस ली, तो सहमा-सहमा सा ही रह गया। कोई ऐसा नहीं मिला जिससे वह दिल लगा सके। वह भटकता हुआ बंजारा, अपने लगाव की तलाश में घूमता-ढूँढता रहता। हमेशा, थोड़े समय बाद उसे कुछ अच्छा लगता, लेकिन जैसे ही वह अच्छा लगता, वह उससे दूर हो जाता। बेचारा दिल खुद को शापित मानने लगा। जैसे-जैसे वक़्त बीता, उसकी तलाश और गहरी होती चली गई। या फिर कहें कि वह और डूबता चला गया। ख़ैर, जब एक दिन उसे कोई हमनवा मिला, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दिन-रात वह खुश रहा, अपने सारे दुख-दर्द भूल गया। लेकिन जैसा हमेशा दिल के साथ होता है, इस बार वह हमनवा उससे छूटा नहीं, बल्कि किसी और का हो गया। दिल उसके साथ था, पर हमनवा का दिल उसके साथ नहीं। इस बार दिल ने उम्मीद ही छोड़ दी। दिल इतना रोया कि उसे चुप कराने के लिए उसे मार ही दिया। जब दिल ...