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समय

बस समय नहीं है मेरे पास, काम की व्यस्तता है मेरे साथ। क्या ही रखूँ किसी से आस, लगता बुरा जब महीनों बाद होती बात। रिश्ते माँगते हैं समय, जैसे पौधा माँगे पानी। मैं कहाँ से दे दूँ समय, जब सूखी ही है मेरी कहानी। लेकिन मैं क्या ही दूँगा समय, जब खुद पर ही नहीं लगाऊँगा। अच्छे से बुरा बन जाएगा मेरा समय, अगर खुद के लिए ही नहीं बचाऊँगा।                                                      - शिनाख्त 

प्रेम का अर्थ

 प्रेम का अर्थ - न पाना , बल्कि  निभाना  सिर्फ शारीरिक सुख नहीं, इसके आगे हैं काफी प्रेम  है अगर सिर्फ पाना , प्रेम का अर्थ  तो शायद है वो शरीर की चाह  है अगर  निभाना , प्रेम का अर्थ  तो है वो जन्नत  की राह  लेकिन बुराई नहीं शारीरिक सुख में  न ही कोई उसके दुख में  लेकिन फिर वो प्रेम नहीं,  कुछ और है , सिर्फ जीवनी की डोर  है  व्यक्ति की पराकाष्ठा है कि  भागता है सूक्ष्म खुशी के लिए  और फिर रोता है बाद में  हर भूली खुशी के लिए  अगर है कोई ऐसा रिश्ता  जो सिर्फ पाना चाहे, निभाना नहीं  तो उसे छोड़ना अच्छा ,  जो तार मंजिल में बाधा बने  तो उसे तोड़ना अच्छा                                            - शिनाख्त