दोस्ती

सौ फ़रेब इश्क़ पर एक दोस्ती भारी रहती है,

हज़ारों वादों पर एक ज़बान भारी रहती है।


लाखों झूठे चेहरे हैं ज़माने में,

कुछ दोस्तों की मुझसे वफ़ादारी रहती है।


चाँद होता होगा किसी के हक़ में, हमें उससे क्या,

हमारी तो जुगनुओं से यारी रहती है।


दुर्योधन के हिस्से में थे कई पाप,

लेकिन पांडवों पर कर्ण की उधारी रहती है।

                                        –शिनाख्त 

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