एकांत

अपनी भी कुछ लोगों से तबीयत न मिली,
इच्छा थी मिलने की, पर दिल की इजाज़त न मिली।

सिर्फ़ गुस्सा ही नहीं था मुझमें लोगों से मिलकर,
बात बस ये थी कि अंदर की तरबियत न मिली।

मिली थी तबीयत एक वक़्त उनसे कुछ कहने को,
वो फिर से मिले कभी, ऐसी ज़रूरत न मिली।

न उनसे कोई बैर है, न कोई दुख है उनसे,
बस यूँ ही फिर न मिलने की इज्जत न मिली।

कितने गिले-शिकवे रखे थे अपनों से,
जब गौर किया तो किसी से शिकायत न मिली।

अपने साथ जो इतना अकेला रहा हूं मैं,
मुझे तो अपनी भी तन्हाई की फ़ितरत न मिली।

                                                   
                                                          - शिनाख्त 


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