स्वार्थी

तू अपनी खोज में निकल तो सही
अपनी राह के लिए चल तो सही

सिर्फ़ खुद के लिए एक बार जी कर देख
लोगों से थोड़ा ऊपर छू कर देख
लोगों का क्या है
अपनी ज़िन्दगी अपने ऊपर लेकर देख
तू तय कर अपनी मंज़िल खुद
और खुद से ख़्वाबों को सीं कर देख

मुश्किल रास्ता ही क्यों चुनना
जब आसान रास्ता भी हो।
किसने कह दिया है मरने को बेवजह,
तू आराम से काम कर और चैन से सो।


फिर मज़ा तुझे खुद से आएगा
तू औरों से नहीं, खुद से खुश पाएगा
बाहर से जीतना क्या जीतना
अंदर से जीत जाएगा

पर

थोड़े बुरे दिन भी आते हैं
थोड़ा ग़म भी सताते हैं

पर वक़्त देना हर चीज़ को
सब्र से बनाना हर दीद को
जल्दबाज़ी अच्छी नहीं होती
ठहराव ही शांति देती है तुझ हसीन को

                                               –शिनाख्त 

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