हो ही जाना है

एक विश्वास रखा है ख़ुद पर,

कि कितनी भी ठोकरें लगें,

मुझे अपने हिसाब से चलते ही जाना है,

ख़ुद को न दुनिया की भीड़ में भगाना है।


इस अंधी दौड़ में अपनी रफ़्तार से,

धीरे-धीरे आँखें खोलकर चलते जाना है,

ख़ुद के हिसाब का, हो ही जाना है।


हो सकता है मैं जीतने से पहले ही हार जाऊँ,

वर्तमान में नहीं, भविष्य में  ही जीत पाऊँ,

इस दौरान, न हार न जीत को सर चढ़ाना है,

इस सब के बावजूद बस अपने रस्ते पर चलते जाना है 


हर कुत्ते का दिन आता है 

मेरा भी एक दिन आना है।


चाहे दुनिया की नज़र में हार जाऊँ,

जैसे दुनिया चाहे वैसे न कर पाऊँ,

पर मुझे ख़ुद पर विश्वास बनाना है,

और मेरा सपना — हो ही जाना है।


चाहे लग जाए थोड़ा समय मुझे,

चाहे लोग न समझ पाएँ मुझे,

अपने तरीक़ों पर ख़ुद विश्वास जमाना है,

जो चाहा है — हो ही जाना है।


दुनिया की बातों में आकर,

मुझे उनका मुश्किल रास्ता न चुनना है,

मुझे ख़ुद का — मेरे लिए,

आसान रास्ता बुनना है।


और अंत में मुझे खुद को ही पाना है 

इसलिए जो चाहा है – हो ही जाना है

                                                – शिनाख्त 

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