दिल–बंद

ये दिल अब किसी के लिए पिघलेगा नहीं
कोई मुझे प्यार करे ,मुझे समझ पाए 
ऐसा कोई ज़रूरी तो नहीं 
कोई उम्मीद न पालो ज़माने से 
दिल को दीवारों के अंदर रखो 
और चाबी उसकी समय को दे दो 
हर किसी पर प्यार लुटाओ दिल नहीं 
खुद को भी प्यार करो 
खुद पर दया करो 
खुद पर काम करो 
खुद को खुश रखो 
जिन बुलंदी के सपने देखते हो 
एक बार उनको पा कर तो देखो 
अभी वक्त नहीं है इश्क का जुआ खेलने का 
अगर हार गया तो कुछ नहीं बचेगा मेरे पास 
थोड़ा दुख होगा पर संभल जाएगा 
कुछ दिल अजीब लगेगा पर ढल जाएगा 
एक नहीं हजारों हैं प्यार के लिए 
सिर्फ दिल नहीं लुटाना एक पर,न किसी पर 
अब मैं नहीं ढूंढता किसी को 
अब कोई मुझे आकर ढूंढेगा


                                                       – शिनाख्त           







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