Infatuation

जो बैठ जाए सामने, तो कब तक तुझे निहारूँ 

अपने ख्वाबों में कब तक तुझे सवारूँ 

अपनी पलके तक न झपकाऊँ पल भर भी 

तू बता ऐसे हालत में कितने जमाने गुज़ारूँ 


रात भर की नींद छोड़ूँ 

दिल को बैचनी से फोड़ूँ 

खुद को तोड़ लिया है बुराई से 

और बता क्या क्या तोड़ूँ 


साल भर का काम एक बार में करूँ 

दिन रात तुझे याद में करूँ 

अब तुझे ख्वाब में मिलू 

और क्या ख्वाब अपने पूरे करूँ 


ये कैसा रिश्ता है समझ नहीं आता 

शायद ये नयापन है, दिल यही बताता 

ये भी ढल जाएगा , 

और मैं खुद से क्या छुपाता


ये बस एक नया एहसास है 

अच्छा है और खास है 

ज़िंदगी का एक और हिस्सा है 

जैसा भी है , दिल में सांस है 

                                       - शिनाख्त 

 


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