हम तेरे प्यार में....
प्रस्तुत गीत दिल एक मंदिर चलचित्र से लिया गया है जिसके बोल हसरत जयपुरी ने लिखे हैं।
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार के
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार के
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम—
पंछी से छुड़ाकर उसका घर
तुम अपने घर पर ले आए
ये प्यार का पिंजरा मन भाया
हम जी भर-भर के मुस्काए
जब प्यार हुआ इस पिंजरे से
तुम कहने लगे आज़ाद रहो
हम कैसे भुलाएँ प्यार तेरा
तुम अपनी ज़ुबां से ये न कहो
अब तुमसा जहाँ में कोई नहीं
हम तो तुम्हारे हो बैठे
तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम—
इस तेरे चरण की धूल से हमने
अपनी जीवन माँग भरी
तभी तो सुहागन कहलायी
दुनिया के नज़र में प्यार बनी
तुम प्यार की सुंदर मूरत हो
और प्यार हमारी पूजा है
अब इन चरणों में दम निकले
बस इतनी और तमन्ना है
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार के
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम—
तुम अपने घर पर ले आए
ये प्यार का पिंजरा मन भाया
हम जी भर-भर के मुस्काए
जब प्यार हुआ इस पिंजरे से
तुम कहने लगे आज़ाद रहो
हम कैसे भुलाएँ प्यार तेरा
तुम अपनी ज़ुबां से ये न कहो
अब तुमसा जहाँ में कोई नहीं
हम तो तुम्हारे हो बैठे
तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम—
इस तेरे चरण की धूल से हमने
अपनी जीवन माँग भरी
तभी तो सुहागन कहलायी
दुनिया के नज़र में प्यार बनी
तुम प्यार की सुंदर मूरत हो
और प्यार हमारी पूजा है
अब इन चरणों में दम निकले
बस इतनी और तमन्ना है
हम प्यार के गंगाजल से, बलम जी
तन-मन अपना धो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार को
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम—
सपनों का दर्पण देखा था
सपनों का दर्पण तोड़ दिया
ये प्यार का आँचल हमने तो
दामन से तुम्हारे बाँध लिया
ये ऐसी गाँठ है उल्फ़त की
जिसको ना कोई भी खोल सका
तुम आन बसे जब इस दिल में
दिल फिर तो कहीं ना डोल सका
ओ, प्यार के सागर हम तेरी
लहरों में नाव डुबो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार को
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
तन-मन अपना धो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार को
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम—
सपनों का दर्पण देखा था
सपनों का दर्पण तोड़ दिया
ये प्यार का आँचल हमने तो
दामन से तुम्हारे बाँध लिया
ये ऐसी गाँठ है उल्फ़त की
जिसको ना कोई भी खोल सका
तुम आन बसे जब इस दिल में
दिल फिर तो कहीं ना डोल सका
ओ, प्यार के सागर हम तेरी
लहरों में नाव डुबो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार को
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
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