अधूरा किंतु पूरा
उसे ढूंढ न सके तो क्या हुआ,
अकेले हैं, अधूरे नहीं, काफी हैं।
वो कुछ न कर पाई तो क्या हुआ,
हम हैं, तुम नहीं — काफी हैं।
कोई छूट गया रास्ते में,
दिल दुख गया,
रास्ता नहीं छूटा,
अब हँसू या रो लूँ।
जो भी हैं, जैसे भी हैं,
थोड़ा रोते हैं, थोड़ा हँसते हैं।
कैसा भी हो रास्ता,
बहादुर नहीं रुकते हैं,
हमेशा चलते हैं।
दुनिया सिखाती है
किसी को ढूंढने को,
अब नहीं ढूंढता मैं किसी को।
अधूरा इश्क था हमारा,
अब अधूरे हैं हम।
और ऐसे ही पूरे हैं हम।
– शिनाख्त
Comments
Post a Comment