ज़िंदगी जीना
ज़िंदगी मुश्किल है
इससे और क्यूं मुश्किल करें हम ,
दुख देती है सबको ज़िंदगी
इसमें और क्यूं भरे गम ।
चार पल की है ज़िंदगी
चारों पल दुख में मत काटो,
दो पल हों खुशी के
दो पल कोई गम बांटो ।
हर दिन दुखी रहो
ऐसा जरूरी तो नहीं ,
दुखी रहना जायज़ है
रोज़ रहो, ऐसी मजबुरी तो नहीं ।
कुछ खुल के , दिल के भी काम करो
खूब मेहनत करो और थोड़ा आराम करो ,
पूरे आटे में हो चुटकी भर नमक
नमक से आटे को न हराम करो ।
– शिनाख्त
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