हम अपने अपने

जब मैं तुमसे बिछड़ जाऊँगा

शायद ख़ुद को किसी के घर पाऊँगा ,

तुम भी छोड़ दोगी मायका अपना

मैं भी अपना एक नया घर बनाऊँगा ।


तुम बन जाओगी किसी और की दुल्हन

मैं भी कोई और गुड़िया ब्याह लाऊँगा,

तुम बिताओगी हँसी लम्हे उसके साथ

मैं भी अपने दुख किसी को सुनाऊँगा ,

वो छुएगा तुम्हें जाना

मैं भी ख़ुद को किसी के क़रीब लाऊँगा ।


तुम सजा लोगी अपनी दुनिया

मैं भी अपना एक छोटा जहाँ बनाऊँगा,

तुम रखोगी उसमें तितलियाँ

मैं भी कुछ परवाने उड़ाऊँगा।


तुम भी व्यस्त हो जाओगी गृहस्थ में

मैं भी किसी के लिए, रात लौट के आऊँगा

तुमको भी मिलेगा अपने कर्मों का सुख

मैं भी अपने कर्मों का फल पाऊँगा।


तुम जियोगी अपनी ज़िंदगी

मैं भी अपनी ज़िंदगी निभाऊँगा।


शायद हम खुश रहेंगे दोनों

एक-दूसरे से बिछड़ कर,

और इसी तरह अपनी कहानी

लोगों को बताऊँगा।

                          – शिनाख्त 

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