दोस्ती या प्यार
तू मुझसे क्यूँ इतनी बातें बनाती है
फिर भी ये रिश्ता नहीं समझ पाती है
मेरे करीब रहती है जो तू इस कदर
क्या तेरे दिल में , मेरी कोई जगह आती है
तू दोस्ती कितनी अच्छी निभाती है
फिर भी खुद को नहीं पहचान पाती है
तू कह देती है मुझसे सब कुछ
और मुझसे तू क्या नहीं छुपाती है
तू नासमझ रह गई इस सब के बाद
तू पतंग की तरह खुद में उलझ जाती है
मैं नहीं हूँ इस उलझन का जवाब
मेरे जाने के बाद तू खुद को पाती है
तुझमे हिम्मत नहीं एक फोन करने की
और मेरा किया फोन तू नहीं उठाती है
ऐसे कैसे कर लू भरोसा तुझ पे
तू कहती है की याद मेरी आती है
तू समझदार नहीं पर महसूस करती है
लेकिन मेरे दिल में समझ पहले आती है
जा माफ किया तेरी नासमझी को
ऐसे तो दोस्ती नहीं निभाई जाती है
मैं दोस्त नहीं हूँ तुम्हारा
मुझे तो बस इश्क की ज़बान आती है
मेरे हिस्से में क्या ही बचता है तुमसे बचकर
मेरे हिस्से में तो बस बेकारारी आती है
कोई नहीं ठहरता हमेशा एक जगह
किसी की यादों से आगे कोई लड़की आती है
और तुम जान देने की कहती थी दोस्ती में
तुम्हें अभी दोस्ती नहीं निभानी आती है
तुम अच्छी दोस्त नहीं हो जाना
तुम जैसी तो बर्बाद कर जाती है
तुम अनजान रही हो खुदसे सदा
और तू मुझे इंतज़ार कराती है
अजीब सी बात है इंसानियत की ये
अंदर होते भी बाहर नजर नहीं आती है
- शिनाख्त
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