लोगों से शिकायत
कि कई काले बादलों से घिरा हूँ,
उड़ने की चाह में कई बार गिरा हूँ।
और जो आपको तंग कर रही है मेरी हमदर्दी,
मैं तो इन्हीं गलियों में फिरा हूँ।
मैं नहीं चाहता कि आप पर बुरा वक्त कभी आए,
पर गलती से जो आ जाए, तो समझोगे
कि कैसे मैं अपनी बातों का सिरा हूँ।
तब तक मुझे रहने दो जैसा मैं हूँ,
दुनिया-सा बनाने की कोशिश मत करो मुझे,
मैं अकेला आया था,
और अकेले ही विदा हूँ।
–शिनाख्त
Comments
Post a Comment