बेवजह बोझ

लोगों के हिसाब से जीते जाना  

उनके हिसाब से ग़म सीते जाना  

खुद के ग़म खुद पीते जाना  

अच्छा नहीं होता  


दिल की बातें अंदर रखना  

आँखों को बेवजह समंदर रखना  

खुद के अंदर खंडहर रखना  

अच्छा नहीं होता  


हर बार सिर्फ जीत को पा लेना  

हर बार हार को छुपा लेना  

कभी हार-जीत की सीख न लेना  

अच्छा नहीं होता  


औरों के लिए खुद को खोना  

उनकी उम्मीदों का बोझा ढोना  

किसी के लिए अच्छा होता होगा...  

मेरे लिए अच्छा नहीं होता

                                     –शिनाख्त 

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