Happy or sad, Thomas.

Feeling sad...dukhi ho...kisi se bhi ...logon se ...yaa khud se ...yaa kisi se ..

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पुराने दुख भुलाने के लिए नया दुख लगता है 

हो चाहें कितने गम ,किसी एक से सुख लगता है 


आते जाते मुसाफिरों की है ये ज़िंदगी 

कितने भी हो सुख, फिर भी दुख लगता है 


कितने अजाब झेले , कितनी खुशी मनाई 

जैसा भी हो वक्त, अपनों के साथ सुख लगता है 


धीरे धीरे सुधर जाते है सब लोग न जाने क्यूं 

आखिर सबको खुदसे ही क्यूं दुख लगता है 


हम तो अपनी कहते हैं, लोग जो समझे 

मेरा किस्सा , किसी को दुख, किसी को सुख लगता है


और कितना भी लिखो तुम शिनाख्त 

कभी न लिखना भी बहुत सुख लगता है


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