Still aching

रेत ना मिली तो शीशी में पत्थर भरे

उस एक जाने के बाद, कितने लोग दिल में भरे


आज तक कोई उसकी जगह न ले पाया 

उसे कौन बताए कि आकर अपनी कमी भरे


उसमें कोई हुनर होगा छोड़ जाने का

हमें तो किसी का मुसलसल साथ भरे


अब उनकी क्या गलती जो साथ में हैं हमारे 

अब जो चले गए उनमें क्या ज़हर भरे


अब बसर कर रहे हैं ज़िंदगी ठीक ठाक

कोई होता तो शायद गुलों में रंग भरे

                                                –शिनाख्त 




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