अपना टाइम आयेगा
पाने के लिए कुछ, छोड़ने की कोशिश करें हम
पहुँचने के लिए कहीं, कहीं से निकलने की कोशिश करें हम
ना पैसा है, ना वक्त है अपने पास
ऐसी गरीबी में जज़्बातों का क्या करें हम
कोई कैसे अपनाएगा इस गरीब शख़्स को
इस अंधी दौड़ में सिर्फ जज़्बातों के साथ खड़े हम
हर लड़की को चाहिए अमीर और हर वक्त का साथ
ये तन्हा, व्यस्त, गरीब… कहाँ जाकर मरें हम
खैर, ये उम्मीद छूटी नहीं है अभी
ऐसे कई ज़ख्म पहले भी भरे हम
आएगा वो एक दिन, जिस दिन की तलाश है
उसी तलाश में दिन-रात काम करें हम
और कितनी भी लंबी हो कतार मेरे सपनों की
चाहे आख़िरी हो जगह हमारी, फिर भी खड़े हम
– शिनाख्त
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