Balance is the way out

अगर ज़िंदगी एक मजबूरी है

तो तवाज़ुन (balance) बहुत ज़रूरी है

थोड़ा अच्छा और थोड़ा बुरा होना चाहिए

लेकिन दोनों से एक हल्की सी दूरी ज़रूरी है


अच्छाई के चक्कर में बिखर जाओगे

बुराई के चक्कर में मर जाओगे

जो हो दिल में वो सिर्फ 

कभी कभी होठों पर आना ज़रूरी है


कभी कभी नाप तौल कर बोलना

कभी कभी दिल खोल कर बोलना

कभी कहीं से बचना है

और कभी कहीं से गुज़रना ज़रूरी है


बुराई में भी लाख मज़े

अच्छाई में भी है एक फिक्र

दोनों दरिया के बीच में

संभल कर चलना ज़रूरी है


तो खुद को बांधो मत

कभी दोनों डोर से

कभी दिल को समझाना

तो कभी जिस्म को समझना भी ज़रूरी है


. शिनाख्त 

Comments

Popular posts from this blog

Unfinished shorts

Current thoughts

लापता