कातिल कौन ?
लाल हाथ हो गये हैं मेरे
अपने ही खून से
लोगों को खुद मैंने दिया मौका
चाकू घोपने का
उन्होंने हँस हँस के मेरी चीखें निकाली
बेकसूर बनकर मेरा खून से प्यास बुझाई
इतने लोगों ने खून किया है मेरा
फिर भी बस मेरे ही हाथ क्यों खून से रंगे हैं
इसका मतलब क्या मैं ही खुद का कातिल हूँ
...
खैर ये उनकी कहानी थी मेरी नहीं
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