गहराई

सिर्फ़ ख़ूबसूरती के लिए नहीं कोई होना चाहिए

कहीं बातों का भी एक बिछौना चाहिए।


यूँ तो जिस्म भी ज़रूरी है मोहब्बत में,

पर इश्क के पैमाने में जिस्म को खोना चाहिए।


ख़ूबसूरती के मायने काफ़ी हैं ज़माने में,

आँखें नहीं, तेरी बातों के लिए कोई रोना चाहिए।


शक्ल, आँखें, पहनावा, जिस्म सब धोखा है,

कोई इनको हटा कर किसी को दिल से पिरोना चाहिए।


कब तक बंद रहते हैं तेरे होंठ मेरे होंठों से,

खुलें तो कोई अफ़साना भी बयान होना चाहिए।


मैं तंग आ चुका हूँ ख़ूबसूरत लोगों से,

मुझे अब खुश इंसान का कोना चाहिए।


जागते हैं जिसकी यादों में ये शख़्स-ए-शिनाख़्त,

अब तुझे भी अपने ख़्वाबों में सोना चाहिए।

                                                      – शिनाख्त 

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