तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
क्या बनोगे तुम एक बुझती आग,
या बनोगे तुम एक जलती राख,
या बनोगे तुम एक पुरानी लाख?
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
क्या बनोगे तुम एक पहाड़,
या बनोगे पत्थर का संसार,
या बनोगे तुम एक अजीब सवाल?
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
क्या बनोगे तुम भी एक कही बात,
या बनोगे तुम बेवक़्त याद,
या बनोगे तुम अपने दिल की बात?
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
जो लोग बोलें वो बनोगे,
जो दिल बोले वो बनोगे,
बनोगे तुम फिर भी ग़ुलाम।
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
तुम बन जाना ग़ुलाम अली ग़ुलाम से,
बन जाना मयख़ाना शराब से,
बन जाना परिंदा ऊँचे आसमान से,
बन जाना मायने अपने नाम से।
तुम जो बनो रहेंगे खाली हाथ,
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
क्या बनोगे एक बहता सा दरिया,
या बनोगे किसी दिल का ज़रिया,
या बनोगे अपनी नज़र का नज़रिया?
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
तुम बन जाना जो रहे तुम्हारे पास,
तुम बन जाना अपने सबसे ख़ास,
तुम बन जाना एक पहेली का जवाब,
जो पहेली गुज़रे ज़िंदगी के साथ।
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
तुम बन जाना एक ज़िंदा इंसान,
न बनना कभी मुर्दों की शान।
जो भी बनोगे, ऐ शिनाख़्त,
तुम रहोगे हमेशा मेरे साथ।
तुम क्या बनोगे शिनाख़्त?
- शिनाख्त
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