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Showing posts from July, 2025

दर्द–ए–दिल

बस मन लगता है अपने काम में पर दिल नहीं लगता किसी भी इंसान में। किस तरह कटेगी ज़िंदगी, सिर्फ़ थोड़े काम में, थोड़े आराम में। ये दिल अब थक गया है दरों पर दस्तक देते-देते, थोड़ा कहीं ठहरे — तो कुछ बात बने। बस एक मन बचा है जिसने पाया है खुद को, उस मन की ख़ुशी में थोड़ा आराम मिले। ज़िंदगी दरिया बन गई, दिल डूब गया, मुझे मेरा मन मिला — वक़्त खूब गया। अब इंतज़ार रहेगा एक उम्र भर, इस दिल को भी कोई किनारा मिले। पुराने घाव अभी भी दर्द देते हैं, कभी उनको भी कोई सहारा मिले।                                              – शिनाख्त 

हो ही जाना है

एक विश्वास रखा है ख़ुद पर, कि कितनी भी ठोकरें लगें, मुझे अपने हिसाब से चलते ही जाना है, ख़ुद को न दुनिया की भीड़ में भगाना है। इस अंधी दौड़ में अपनी रफ़्तार से, धीरे-धीरे आँखें खोलकर चलते जाना है, ख़ुद के हिसाब का, हो ही जाना है। हो सकता है मैं जीतने से पहले ही हार जाऊँ, वर्तमान में नहीं, भविष्य में  ही जीत पाऊँ, इस दौरान, न हार न जीत को सर चढ़ाना है, इस सब के बावजूद बस अपने रस्ते पर चलते जाना है  हर कुत्ते का दिन आता है  मेरा भी एक दिन आना है। चाहे दुनिया की नज़र में हार जाऊँ, जैसे दुनिया चाहे वैसे न कर पाऊँ, पर मुझे ख़ुद पर विश्वास बनाना है, और मेरा सपना — हो ही जाना है। चाहे लग जाए थोड़ा समय मुझे, चाहे लोग न समझ पाएँ मुझे, अपने तरीक़ों पर ख़ुद विश्वास जमाना है, जो चाहा है — हो ही जाना है। दुनिया की बातों में आकर, मुझे उनका मुश्किल रास्ता न चुनना है, मुझे ख़ुद का — मेरे लिए, आसान रास्ता बुनना है। और अंत में मुझे खुद को ही पाना है  इसलिए जो चाहा है – हो ही जाना है                             ...

स्वार्थी

तू अपनी खोज में निकल तो सही अपनी राह के लिए चल तो सही सिर्फ़ खुद के लिए एक बार जी कर देख लोगों से थोड़ा ऊपर छू कर देख लोगों का क्या है अपनी ज़िन्दगी अपने ऊपर लेकर देख तू तय कर अपनी मंज़िल खुद और खुद से ख़्वाबों को सीं कर देख मुश्किल रास्ता ही क्यों चुनना जब आसान रास्ता भी हो। किसने कह दिया है मरने को बेवजह, तू आराम से काम कर और चैन से सो। फिर मज़ा तुझे खुद से आएगा तू औरों से नहीं, खुद से खुश पाएगा बाहर से जीतना क्या जीतना अंदर से जीत जाएगा पर थोड़े बुरे दिन भी आते हैं थोड़ा ग़म भी सताते हैं पर वक़्त देना हर चीज़ को सब्र से बनाना हर दीद को जल्दबाज़ी अच्छी नहीं होती ठहराव ही शांति देती है तुझ हसीन को                                                –शिनाख्त  

सुकून और सब्र

किस क़दर उदासी छाई है,   आज वो नहीं आई है।   आई है तो बस उसकी याद,   बताओ, इस क़दर बेवफ़ाई है। तेरी यादों की बारात ही सही,   उसकी आख़िरी मुलाक़ात ही सही।   मेरे अंदर वो ज़हर का घूँट,   तेरे अंदर की बात ही सही। मेरी इच्छाओं का मरना अच्छा है,   उन इच्छाओं की याद में एक नज़्म लिखी है। कुछ कुर्सी का अंदाज हमें बहुत पसंद आता है पर साथ में तालमेल नहीं बैठ पाता है अब थोड़ा वक़्त दो उनको दफ़नाने को,   थोड़ा वक़्त दो, आँसू आने को ।   थोड़ा जीभर कर रोने को ,   फिर जीभर कर ख़ुश होने को। ये वक़्त भी चला जाएगा,   साथ में कुछ सबक़ लाएगा।   बस कोई जल्दी नहीं है अब,   सुकून लाने की भी जल्दबाज़ी नहीं अब।   सब्र करना है मेरी क़िस्मत,   और राज़ी है अब सब।                                   – शिनाख्त 

2 STORIES AND EXAM PREPARATION

Story 1  The Hat Seller and the Monkeys this story was told us by one of my professors, when it was his last teaching class(probably).it goes like something this there was a vendor who used to sell hats. he used to go his nearby villages to sell hats with a basket on his head which is usually full of hats. due to scorching heat in the season of summer, he used to rest in the afternoon. this was his way of life. one day when was taking a nap in the noon in the shade of a tree, a group of monkeys came and took all the hats and left the basket empty. when he woke up after taking nap, he saw that all the hats are not there, then he saw the monkeys on the branch of that tree. he try to persuade monkeys with all he have but all them have problem of mimicking and copying every act the person does. soon after , the person came up with idea and he wear the cap that he has, so does the monkeys and then he threw it on the ground so does the monkeys, and when they did such thing, the person co...