शांति
ना ख़ुशी है
ना दुख है
ना भयावह है
ना तुच्छ है
ना मन है
ना माया है
ना शोर है
ना साया है
ना उदास है
ना कठोर है
ना विरह है
ना चकोर है
ना विरक्ति है
ना भाव है
ना आँधी है
ना शांत है
ना मिलना है
ना बिछड़ना है
ना बोलना है
ना पूछना है
बस एक पेड़ है
एक हवा है
कुछ पत्तियाँ हैं
और मैं हूँ
शायद यही शांति है
और मन ख़ाली है।।
– शिनाख्त
Comments
Post a Comment