तेरी औकात क्या है, शिनाख़्त

तू प्यार मांगता है?

तू दर्द जानता है?

तू ज़ख्म मानता है?

तेरी औकात क्या है!


तूने दुनिया देखी?

तूने रास्ते बदलते देखे?

तूने देखा है नज़र भर?

तेरी औकात क्या है!


तूने क्या कमाया?

तूने क्या गंवाया?

तूने क्या लुटाया?

तेरी औकात क्या है!


क्यों मिले तुझे सब?

क्यों दिखे तुझे रब?

क्यों रहें तेरे सब?

तेरी औकात क्या है!


तू बना पहले अपनी पहचान,

तू रख पहले कोई निशान,

फिर पूछना ज़माने से,

तेरी औकात क्या है!

                          – शिनाख्त 

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