क्या है ?

ज़माना पूछे जिस्म, बता क्या है,
मैं पूछूँ तेरी हया क्या है।

मैं तेरे पीछे पागल हो जाऊँ,
ये तो बता, ऐसा तुझमें नया क्या है।

तेरे जाने के बाद मैं ज़िंदा हूँ,
तेरे जाने के बाद फिर गया क्या है।

खुदा भी आ गया है मेरे साथ,
बता तेरे पास अब बचा क्या है।

इंसानियत के फ़र्ज़ निभाते रहे,
और पूछूँ खुदा से कि दया क्या है।

ज़हर भी हँसते-हँसते पी रहा हूँ,
और बता, इससे बड़ी दवा क्या है।

साँसों का चलना भी उसका रहम है,
वरना इंसानों के पास आखिर रखा क्या है।

                                                       – शिनाख्त 

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