दोस्ती बनाम प्यार

दिल के ज़ख्म दोस्ती से नहीं भरते

किसी के चले जाने से हम नहीं मरते


ज़िंदा भी कैसे रहते हैं पता नहीं

उस पर मरते थे, अब किसी पर नहीं मरते


फ़िक्र रहती है रात-दिन अपने सपनों की

काम शायद करते हैं, पर कुछ नहीं करते


और फ़िलहाल बस बच जाएँ ज़िंदा दुनिया से

हम ख़ुद के अलावा किसी और से नहीं डरते


गहरी बातें कहने का कोई शौक़ नहीं है

क्या करें, लोग सीधी बातों पर अमल नहीं करते।

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