एक अजीब दर्द
तेरे जाने के बाद कुछ बचा ही नहीं
बचता कहाँ से कुछ था ही नहीं
सुन लिया सब जो तूने कहा ही नहीं
तेरे जाने के बाद मैं, मैं रहा ही नहीं
सोचकर दुखी रहता हूँ अक्सर
वो जो हमारे बीच कभी हुआ ही नहीं
एक पत्थर है जो बच गया है रोने को
ये दिल अभी तक पत्थर बना ही नहीं
अब कैसी कशमकश में रहता हूँ
तू नहीं तो लगता है कोई मज़ा ही नहीं
दिल बहलाने के लिए काम करते हैं
पूछे कोई तो काम में कुछ मज़ा ही नहीं
कैसे पड़े इस दिल को आराम , कोई बताए
कहते हैं इस दर्द की कोई दवा ही नहीं
- शिनाख्त
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