गर्मी और ग़ालिब
लाइट ये क्यूं रात भर नहीं आती
ठंडक कहीं भी नज़र नहीं आती
आती थी पहले गर्मियों में नींद
अब बिना AC के रत्ती भर नहीं आती
आती थी अफ्रीका के लोगों पर हंसी
अब अपनी भी हालत पर नहीं आती
है ऐसी गर्मी कि जग रहा हूं वरना
जागने की हिम्मत दिन भर नहीं आती
बिजलीवालों से चिढ़ है कुछ इस कदर
नाम पर बची गाली नज़र नहीं आती
आजकल ऐसी जगह जाना चाहता हूं
जहां से गर्मी की कोई खबर नहीं आती
हमेशा बिजली की उम्मीद में बैठा रहता हूँ
खबर आती है, बिजली मगर नहीं आती
बिजली के नाम पर वोट मांगेगा दोबारा
मेरी तरह शर्म उसको भी मगर नहीं आती
–शिनाख्त
Comments
Post a Comment