Solitude is discipline, loneliness is not fear
अपनी तन्हाई को यूँ ज़ाया न किया जाए
कुछ दिन खुद के लिए भी जिया जाए
और ज़रूरी है क्या लोगों से मिलना हमेशा
ना चाहते हुए भी लोगों से क्यों मिला जाए
इस डर से कि मर जाऊँगा अकेले मैं
अपने अंदर बेकार सामान को न भरा जाए
वो क्या सोचेगा, मैं क्या सोचूँ
ये डर कर कब तक इस ज़ेहन में जिया जाए
कहीं बुरा न लग जाए किसी को मेरा कहा
कब तक अपनी बातों को दिल में रखा जाए
थोड़ी हिम्मत दिखा चोट सहने की दोस्त
वरना पत्थर को मूर्ति कैसे बनाया जाए
अगर तुम खुद नहीं हो जैसे तुम चाहते हो
तो कैसे अपने जैसे इंसानों को ढूँढा जाए
जिनसे मिल पाए ये दिल की बातें, रखो पास
क्यों बेवजह भीड़ का बोझ बढ़ाया जाए
इतना वक़्त क्यों देना किसी को बेवजह
बस अपनों और अपने काम पर ध्यान दिया जाए
खुद को बचाने में और दूसरों को गिराने में
एक पतली सी अदब का पूरा ध्यान रखा जाए
– शिनाख्त
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