वो रात

कभी वो रात आएगी तुम्हें हर बात कह दूंगा,
मेरे अंदर दफ़्न हैं जो सभी जज़्बात कह दूंगा।

वैसे तो चुप रहने की एक आदत सी है मुझमें लेकिन,
जो अकेले नहीं कह पाता, तुम्हारे साथ कह दूंगा।

मुझे नहीं पता कि कैसे होते हैं दो जिस्म एक जान,
मैं तो मुश्किल में तुम्हारे हाथ को अपना हाथ कह दूंगा।

मैं नास्तिक आदमी हूं या नहीं, क्या पता लेकिन,
तुम साथ हो तो पत्थर को भी भोलेनाथ कह दूंगा।

सब कहते हैं इश्क़ में दिन को रात कहने की,
मैं तुम्हारे बगैर कैसे रात को रात कह दूंगा।

यूँ तो मौसमों की ज़्यादा ख़बर नहीं है मुझे लेकिन,
जो बरसने लगे आँखें तेरी, मैं उसे बरसात कह दूंगा।

जो हो जाएँ कभी तेरी आँखों के शिकार हम,
इसे अपने शहर की एक हसीन वारदात कह दूंगा।

वैसे तो कोई दर्द नहीं है अब तेरे आने से,
मगर तेरे जाने पर इन आँखों को दर्द की दवात कह दूंगा।

अब लिखते रहना तेरे बारे में कोई नई बात नहीं,
फिर भी मैं तुझे अपने लिखने की शुरुआत कह दूंगा।

- शिनाख्त 
...

Thanks to raftaar and krsna for that song...woh raat

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