एक ख़्वाब

हमेशा खुश ये ज़िंदगी रहे,
जैसे कोई मीठी दीवानगी रहे।

जितना ख़राब ये दिमाग़ है,
उतनी सँवरी ये ज़िंदगी रहे।

ख़ुदा रहे या न रहे मगर,
उसकी हमेशा बंदगी रहे।

जैसे भी गुज़रे रात मेरी,
सुबह में फिर ताज़गी रहे।

तू कितना भी हो समझदार,
ज़िंदा तेरी सादगी रहे।

मोहब्बत हो जाए इक बार अगर,
क्या फिर कहीं दिल्लगी रहे?

मैं कितना खुशनसीब हूँ कि,
मरकर भी ज़िंदा आशिक़ी रहे।

– शिनाख्त 

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