आज जंतर मंतर पर

आज जंतर मंतर पर लोगों का कत्ल-ए-आम हुआ है,
देश का हर नेता क्या धर्मेंद्र प्रधान हुआ है।

बच्चे मरे, रोते रहें,
जनता जगे, नेता सोते रहें,

खुल पर बातें कहना यूँही बदनाम हुआ है,
देश में हर नेता क्या धर्मेंद्र प्रधान हुआ है।

कुछ कह नहीं सकता,
डरता हूँ बड़े बड़े लोगों से,
बड़ी बड़ी लाठियों से,
उन आँसुओं के गोलों से,

ये सब देखकर आँखों का बहुत बुरा हाल हुआ है,
देश में हर नेता क्या धर्मेंद्र प्रधान हुआ है।

कुछ खुलकर कहते नहीं, सत्ता से ही घबराते हैं,
अपने खुलकर विचार रखने से हम यूँ ही कतराते हैं,
पिट रही हैं जनता, नेता लोग इतराते हैं,
देखकर हालात मेरे अंग अंग घबराते हैं।

आज जो लोकतंत्र चीर-हरण सरेआम हुआ है,
देश का हर नेता क्या धर्मेंद्र प्रधान हुआ है।

मैं बड़ी बड़ी बातें नहीं कहना चाहता,
न मैं किसी तरफ का होके रहना चाहता,
कुछ इंसानियत भी बच जाए लोगों में,
बस किसी गुरूर में हमेशा बहना चाहता।

अब क्या ही बोलूँ,दिल दिमाग में बवाल हुआ है,
क्या देश का हर नेता धर्मेंद्र प्रधान हुआ है।

- शिनाख्त 

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