क्या बचा ?

डह गई तरकीबें तमाम 
रह गया छोटा सा काम

मैं बनने चला था पेचीदा
आखिर में रह गया आम 

आज दिन ढला ही नहीं 
फिर भी हो गई है शाम 

सोचा था बचेगा कुछ न कुछ
न मैं रहा न बचा मेरा नाम

वो खूबसूरत है हद से ज्यादा 
इसलिए याद नहीं मेरा नाम 

अब डर नहीं है अकेले से 
ये बातें कहने लगा सरेआम

जो कर लिए इतने पाप मैने 
मरते वक्त क्या निकलेगा हरे राम

- शिनाख्त

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