ज़ख्म
इतने ज़ख़्म लगे हैं, पूछे तो कोई,
इतने ग़म सहे हैं, पूछे तो कोई।
ये जो निशाँ हैं तेरे जिस्म-ओ-बदन पर,
किसका सितम सहे हैं, पूछे तो कोई।
रूह बची है या वो भी दफ़्न हो गई,
कितने दर्द सहे हैं, कोई पूछे तो कोई।
तू क्यों छुपाती है चेहरा अपना,
क्यों दर्द ढके हैं, पूछे तो कोई।
तू क्यों बुलाती है सबको अपना,
फिर ख़ुद से क्यों परे है, पूछे तो कोई।
अगर तू बताती है सबको सबकुछ,
हम भी खड़े हैं तेरे दर पे,
तेरे हमदर्द बने, पूछे तो कोई।
सवाल ऐसे बहुत हैं दिल में मेरे,
हम भी पूछे तुझसे अगर पूछे तो कोई।
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