अकेले चलो

कभी-कभी खुद को खुद संभालना पड़ता है,
खुद को खुद के ही जाल से निकालना पड़ता है।

जब खुद ने ही तय की है अपनी मंज़िल,
तो बिना किसी के सहारे खुद को चलाना पड़ता है।

कोई नहीं आता है, शायद न कोई आएगा,
कभी खुद को भी अकेले आज़माना पड़ता है।

बिन हमसफ़र भी मुश्किलों से भरा होता है सफ़र,
हमसफ़र हो फिर भी खुद से दिल लगाना पड़ता है।

अगर नहीं हो पाए अकेले तुमसे ये सब,
तो अपने ही हाथों अपना रास्ता गंवाना पड़ता है।

- शिनाख्त 

Comments

Popular posts from this blog

Unfinished shorts

Current thoughts

लापता