काम करो ... do the work

जो बिगड़े हैं हालात शिनाख्त , क्या करोगे तुम?
अब कोई जगह नहीं बची शिनाख्त , कहाँ जाकर मरोगे तुम?
दुनिया से लड़कर जीत जाते थे, खुद से ही हारकर कहाँ रहोगे तुम ।
अब जैसे हो वैसे ही खुद को स्वीकार करो तुम , धीरे-धीरे आगे यूँ ही बढ़े चलो तुम।
गलतियों को भूलकर कुछ काम करो, जो बीत गया वो बीत गया उसे न याद करो।
आगे चलने को है रास्ता बहुत, आगे मिलेंगी मंजिलें बहुत।
खुद को हारकर अगर बैठ जाओगे, कैसे खुद की जिंदगी पार लगाओगे।
खुद से जंग नहीं प्यार करो, बेवजह खुद पर न वार करो।
सब भूलकर बस कुछ काम करो, बस काम करो, कुछ काम करो।
आलस से लड़ना मत उसे समझना ही , समझना ऐसे कि आलस तो होगा ही।
खुद से लड़ने की वजह समझना खुद को और फिर काम करना, बनाना खुद को।
मुश्किलें तो कम न होंगी और बढ़ेंगी खत्म न होगी।
उन्हें समझते चलना लड़ने की जगह, इसी तरह आगे बढ़ते चलना योद्धा की तरह

- शिनाख्त 

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