सोचो मत

Zakir Khan parody on exam 

इतना क्या सोचते रहते हैं,
दिल लगा या मन नहीं लगा,
क्या सोचते रहते हैं?

पढ़ाई के वक़्त बैठकर
क्या खोजते रहते हो?
मन लगा या नहीं लगा,
लोगों से क्या बोलते रहते हो?

कितने सवाल बने,
कितने छूट गए,
कितने घंटे पढ़े,
कितना काम किया।

मन का हिसाब नहीं लगा पाए
इस बार भी,
एग्ज़ाम क्लियर नहीं कर पाए
इस बार भी।

- शिनाख्त 

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