समाज और खुशी
खुशी से फासला कम न करना
बीती बातों पर गम न करना
चाहे हो जाए ज़माने भर से दुश्मनी
खुद से दोस्ती खत्म न करना
सलाह देते रहेंगे लोग यहां पर
पर खुद की बात पर भरम न करना
हाँ, आंखों में पानी रखना सबके लिए
पर वक्त आने पर शरम न करना
जो जाना चाहे जाने देना उसे
बेबात अपनी आखें नम न करना
किरदार में सादगी रखना दुश्मनों के लिए
पर ज़ख्म पर कभी मरहम न करना
दो बातें हस के करना सबसे
पर बेवजह किसी को सनम न करना
जब जरूरत हो तभी बोलना पुरजोर से
वक्त निकलने पर लोहा गरम न करना
जब आँच आजाए अपनों के ऊपर
तो लहजा अपना नरम न करना
ये दुनिया है ,यहां सबकी सुनना
पर किसी पर भी ह्म्म न करना
- शिनाख्त
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