मेरी चाहत
अगर मेरे बस में होता,
तो दिल तेरा कभी न रोता,
दिन भर वो मोहब्बत में खेलता,
रात को वो चैन से सोता,
अगर मेरे बस में होता।
मैं लाता हर जुगनू तेरे लिए,
मैं बनाता हर चेहरा तेरे लिए,
तू रहती खुश हमेशा,
मैं शहर सजाता तेरे लिए,
अगर मेरे बस में होता।
तेरे दुश्मनों को फाँसी देता,
तू कहती तो माफ़ी देता,
तुझे दुनिया को दिखाता,
दुनिया की तुझे झाँकी देता,
अगर मेरे बस में होता।
लड़ जाता सबसे तेरे लिए,
सुन लेता सबको तेरे लिए,
मैं क्या ही करता कुछ बनकर,
पर बन जाता कुछ तेरे लिए,
अगर मेरे बस में होता।
- शिनाख्त
Comments
Post a Comment