Leave me alone

मुझे गुमनामी में जीने दो,
मुझे अपना ज़हर पीने दो।

तुम्हारा जो मन करे वो करो
मुझे अपनी फटी सीने दो।

तुम बढ़ाओ लोगों से बातचीत
मुझे खुद की बातों में जीने दो

तुम्हे मुबारक हो लोगों की तारीफ
मुझे मेरी घबराहट के पसीने दो

अब कब लौटेगा वो दिन क्या पता
जब था दिल एक, सीने दो

रास्ते अलग हैं सबके, मंज़िल एक
जैसे हो छत एक, ज़ीने दो।

ये कैसा जन्मदिन मनाते लोग
चाहे बच्चे हों अभी महीने दो

मैं बस खुद के लिए लिखता हूं
मुझे कागज को कलम से सीने दो।

- शिनाख्त 

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