vulnerability

हैं कहने को बातें हज़ार,
कोई सुने नहीं तो हैं बेकार।

किससे कहूँ अपने दिल की,
सब लोग हैं यहाँ बेज़ार।

जानता हूँ सबकी हक़ीक़त मैं,
हैं सब लोग यहाँ दिल से बीमार।

एक काम हो तो कर भी लूँ,
यहाँ तो हैं मुश्किलें हज़ार।

डरता हूँ ख़ुद के बारे में बताने से,
कहीं बाद में मेरी बातें मुझ पर वार।

बनाया है एक महल अपना, अपने अंदर,
घर काँच का और हैं लोहे की दीवार।

बड़े सपने पूरे करने की कीमत चुका,
और रहता हूँ इसी तरह बस ख़ुद में बेज़ार।

कोई होता जिसे मैं अपना कहता,
खुलकर कहना तो है यहाँ मार।

अब कैसे भी ख़ुद को ख़ुद ही चलाओ,
सब लोग तो हैं यहाँ लाचार।

- शिनाख्त 

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