kuch baatein
अपने इन सच्चे जज़्बातों का क्या करूँ मैं
सुन लेते है , कोई समझ भी ले
सुन लेते है , कोई समझ भी ले
झूठे लोग है , समझ नहीं आती उन्हें ये सब
ढोंग करते है समझने का
अगर मुंह से निकली है
और वो आपके किरदार में न दिखें तो क्या फायदा
दिल की बातें करने वाला इंसान या सच्चा इंसान
थोड़ा घबराया हुआ ही रहता है
इतने साफ तो आयने भी नहीं होती
जितने साफ किरदार बना लेते हैं झूठ का
सच किरदार में बसता है
झूठ बातों से थोड़ी चीड़ होती है
उसकी ज़बान कुछ कह रही है
और इसकी हरकतें कुछ और
इतना डरते हो दुनिया से की
खुद को ही खुद से दूर कर बैठे को
झूठा इंसान डर पोक ही होता है
सच्चा व्यक्ति चोट खाकर हिम्मत रखता है खड़े होने की
इतना खुश देखकर हैरान होता हूं
की ये सब झूठ है, कुछ दर्द तो रहते ही हैं
khud ko time de
common terms par mil
explain kar puri tarah se
samjha usko ki abhi aisa hai hamesha nhi rahega
ek maturity insaan mai aati hai kaam ki
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