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Showing posts from October, 2026

Always problems in life

Mujhe lagta tha ki jis din life main problems end ho jayegi uss din se main dhang se padhna shuru kar dunga...problems jaise mood na lagana, apni insecurities, aapke baare main kahi hui baatein logon ki, bandi ki dikkat, sexual problem and many more ... But I realised somehow...its not that way to live a life...kyunki zindagi main dikkatein ek ke baad aati rehti hai...kabhi perfect time nhi hota ...kabhi bahar ki dikkatein toh kabhi andar ki... Isliye inke saath hi kaam karna hota hai. Agar tum zindagi main saari dikkatein abhi hatane ki koshish karoge toh zindagi kab jiyoge..kab kaam karoge ...i mean zindagi dikkat se milkar bani h ....iska matlab ye bhi nhi hai ki bilkul kaam na kare..rather kaam karo dikkatein dur karne ki koshish karo...but ye samjho ki har pareshani abhi solve nhi karni hoti..aur har problem solve ho bhi nhi paati ... Kuch dikkatein ke saath kaam karna hota hai... that's the skill. And aaj ke baad is baat ko dhyan rakhunga

ज़िंदगी

देखा है ज़िंदगी को गौर से  सुनी है ख़ामोशी बड़े शोर से हर वक़्त मुश्किलों का पहाड़ है तुम कैसे संभलोगे इस दौड़ से कुछ नहीं मिला तो ख़ुद से उलझ गया रहा परेशान मैं हमेशा इस दौर से पता नहीं कैसे जीत जाते हैं लोग हमने हारी है बाज़ी एक मोड़ से यही है सार ज़िंदगी का मेरा दिक्कत उठती है साथ हमारे भोर से तू कर एक कोशिश सबके बावजूद बदलते देखेगा स ब कुछ एक छोर से - शिनाख्त 

अभागा मैं

हर किसी को प्यार नहीं मिलता यहां  रह जाता हम जैसा कोई दीवाना यहां इस दुनिया से उठने वाला है दिल मेरा  रोक ले कोई उठने से मेरा जनाज़ा यहां कोई क्यूं प्यार करेगा इस शक्स को  मुझसे पहले मरा हुआ है जमाना यहां हो सकता है कोई दिलकश भी बची हो  हो सकता है कोई महफ़ूज़ भी रखी हो  आयेगा मेरे हक में कैसे किसी का प्यार  रखता हूँ जो खुद का बंद कमरा यहां सोचता हूं खुल जाऊँ अपने लोगों से पहचानता नहीं कौन है अपना यहां वैसे तो डर नहीं है कुछ खास मुझे पर  डरता हु बन जायेगा मेरा तमाशा यहां  इसी गुमनामी में दुखता है दिल मेरा रह गया हूँ जो सबसे अभागा यहां मन नहीं करता इस ज़माने में रहने का  रह गया हूँ जो ज़माने से बेगाना यहां - शिनाख्त

you are good bro

I'm not writing today to correct myself, nor am I complaining about myself. Today, I experimented a lot. I approached people, asked women out, and put myself in situations I usually wouldn't. And honestly, I'm not disappointed. Instead, I learned a few things about myself and how the world works. The first thing I realised is that I crave sexual experiences. I don't know whether it's testosterone or something else, but I often find myself looking for women, craving sexual pleasure and wanting to experience intimacy. Sometimes, I tell myself not to watch too much porn. Other times, I think about masturbating without porn. But the desire keeps coming back, and I'm trying to understand where it comes from and what I'm actually looking for. The second thing I realised is that finding a girlfriend requires more than simply approaching someone you find attractive. It requires a social environment where you can meet people regularly, interact with them, and gradu...

अंत

मुझ जैसा तुझे कोई और न मिले इश्क का ऐसा कभी दौर न मिले  रहे खुश हमेशा मेरे जाने के बाद  ज़िंदगी में गम का कभी शोर न मिले तेरी बिदाई जो जाए मेरी यादों से भी मुझे वो उम्मीदों का भी शोर न मिले खिलखिलाए हमेशा चाँद की तरह तू  तेरी रातों को इस अमावस की कभी भोर न मिले  जैसी ज़िंदगी चाहे तू वैसी जिये  मेरी जिंदगी में कभी चकोर न मिले मैं जो मर चुका हूं वो ही अच्छा है मुझ जैसा तुझे कभी शौहर न मिले मुझे मौत आये तो बस उम्र से  और तुझे मजबूरी में भी जौहर न मिले  हो जाएं तेरे रास्ते हमेशा अलग मुझसे  मेरे रास्तों की तुझे कभी छोर न मिले मेरा दिल बन चुका है पत्थर अब इसे पिघलाने वाला कोई घन घोर न मिले जो दिल ले गई थी, दफना देना उसे टूटी चीजों का कहीं जोड़ न मिले  मैं मर के उड़ूंगा हवाओं में  मुझे बीते वक्त की कभी डोर न मिले अब आए ज़माने भर से बारात मेरी दुश्मन कोई मुझे अब कमज़ोर न मिले  अब आएगा मजा जीने में इस कदर बाग जैसे मिलेगा सब पर मोर न मिले मैं जिऊंगा बेधड़क जैसे दिल गया दिखाऊँगा क्यूं मुझ जैसा अब और न मिले जिस दिन उठेगा जनाज़ा मेरा शहर से कंधे दे...

खुद के साथ

ज़िंदगी देखने की आदत डालो सारे वहम अपने खुद ही निकालो मत भागो डर से इतना दूर  आये जब मौत तब दाँत निकालो डरो मत अकेलेपन और खालीपन से उनको तो अपना जिगरी दोस्त बना लो करो खुद को बुलंद इतना कि  जब बोलो तब मुंह से आग निकालो खुद से भागने की क्या कोशिश  खुद के साथ अपनी जिंदगी बना लो  - शिनाख्त 

खाली बैठो

अक्सर आजकल खाली बैठा रहता हूँ मैं  न जाने खुदसे क्या कहता रहता हूँ मैं लोगों से भर गया है घर मेरा आजकल ऐसे घर में अकेला अकेला रहता हूँ मैं न जाने कितनी दिक्कतें और आएंगी सब कुछ जो अकेले सहता रहता हूँ मैं हिम्मत न हारो, सब्र पालो, सबका वक्त आता है सबसे आजकल यही कहता रहता हूँ मैं अब छोड़ देता हूं जब मन नहीं लगता खुद को इतना भी नहीं कहता रहता हूँ मैं पढ़ने में मन नहीं लगता तो खाली बैठ जाता हूं ऐसे वक्त में कुछ नहीं करता रहता हूँ मैं बुकौस्की की ये बात मानता हूं मन के लिए बिना कोशिश किए खाली बैठा रहता हूँ मैं - शिनाख्त

curiosity is the way for making mood.

आंखों देखी

अपनों को बदलते देख रहा हूँ, जैसे-जैसे वक़्त को निकलते देख रहा हूँ। मैं बिगड़ा हूँ इस क़दर कि अब, ख़ुद को सँभलते देख रहा हूँ। कुछ अपनो को दिल से उतरते देख रहा हूँ, कुछ ग़ैरों को दिल में उतरते देख रहा हूँ। जो सोया नहीं हूं इतनी रातों से सूरज जो अपना निकलते देख रहा हूँ। इतना दुखी जो होकर बैठा रहता हूँ  अपनी ही शामों को ढलते देख रहा हूँ। वो जो सोचकर बैठ गया था दिल मेरा, आज उसको भी वहाँ से चलते देख रहा हूँ। मैं तो अर्पण कर आया था सब कुछ, अब गंगा में हाथ मलते देख रहा हूँ। ये कैसी दुनिया है, जिसे बिखरते देख रहा हूँ, क्यों फिर भी ख़ुद को निखरते देख रहा हूँ । - शिनाख्त 

Faiz couplet

Some time ago, Faiz wrote about the failure of love in his couplets. दोनों जहाँ तेरी मोहब्बत में हार के वो जा रहा है शमे ग़म गुजार के वीरान है मैकदा, खुमो सागर उदास हैं तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के। So I will try to write next about it. अंदर एक काँच टूटा सा है ज़ेहन मेरा मुझसे रूठा सा है तू है कहाँ पता नहीं मेरा दामन तुझसे छूटा सा है मिल जाएगा प्यार आसानी से अपने जैसा प्यार मिलना झूठा सा है देखो कैसे जी रहा हूँ इस ज़माने में दिमाग ऊंगलियाँ हैं दिल अंगूठा सा है कब आएगी बहार क्या पता कहते हैं लोग इंसान थोड़ा अनूठा सा है। -शिनाख्त.

yes i changed

my love is toxic somehwhere...Fuck instagram...i don't want those girls ... I don't want insta girls ...haan i changed... Now I don't want any love. I got preference developed...now i became like others . And I am not disheartening by the rejections, now I want a girl who I can sit near me . I want a physical love. I want a bandi in real life to whom I can spend my most of time . Baaki sab time paas . Jo mujhe nhi chahti  Un jaisi ko main dekhta tak nhi  Ab main badal gya ...tum zimmedar ho mere aise haal ke  Jo tha masoom pyaar usse kaatil tum  Ab aayi hai jo samjh ishq main . Ab khud ki kuch preference hai ... Main ho bana gya hu bada  Wajah bane ho tum  Main jo bana hu kada  Wajah bane ho tum  Pyaar paana bahut aasan hai Apni tarah ka pyar paana mushkil hai bahut  Wajah bane ho tum caution .. don't hurt anyone intentionally

अकेलापन

ये अकेलापन मुझसे तो नहीं संभलता,  मेरी आग में, अकेला मैं ही जलता।  इतनी सख्ती का क्या करूं कोई बताए,  जब कोई मेरे लिए ही नहीं पिघलता।  काम में उलझा लूं खुद को तो ठीक,  होश आने पर अंदर ही अंदर जलता।  कितनी भी कर लूं कोशिश अपने लिए,  ये वक्त मेरा आखिर क्यों नहीं बदलता।  शिकायतें छोड़कर हो गया हूँ चुप,  अब कभी-कभी मेरा बेवजह मन नहीं लगता। - शिनाख्त

जाने भी दे

कब तलक ख़ुद को शिकवों में डुबाओगे, कब तलक आगे बढ़ने से कतराओगे। कौन था ग़लत, कौन था सही, क्या पता, क्या इन बातों का कभी हिसाब लगा पाओगे। जो तुम चाहते हो सबको इतना दिल से, ऐसे रहे तो सबके दिल से उतर जाओगे। कब तक ढूँढोगे सबूत वफ़ा-बेवफ़ाई के, इस तरह तो तुम यक़ीनन पागल हो जाओगे। ये कश्ती इश्क़ की डूबी ही रहती है, तुम्हें क्या लगा था, दरिया पार कर जाओगे। जो हुआ सो हुआ, ख़त्म कर दे ये बातें, बीती बातों में ख़ुद-ब-ख़ुद उलझ जाओगे। जो हो चुके हैं दरवाजे बंद, छोड़ो उनको  कब तलक वहाँ बैठकर शामें बिताओगे  मुड़कर देखना भी मत, चाहे हार हो या जीत, वरना इस चक्रव्यूह में हमेशा फँसे रह जाओगे। - शिनाख्त 

if ever feel rejected ..read it

Log kitne insensitive hai ...you don't know...agar koi tujhe accept nhi kar raha hai...despite itna ...they are not yours . And can not be yourz ...you need sensitive people... You don't know how much people could be insensitive. And iska matlab ye nhi hai ki all people are bad...it 's just ...you have to search ...aur khoj main har tarah ke log milte hai...we just became bias towards bad things. Teri sab se ban nhi skti...nibah skti hai kya fir ... .. But if someone loves me...main nibha skta hun...no matter how other things are .. I mean vibe is more important... But people have their own standards...they could choose you and leave you . And it's hard fact to accept

My hindsight bias of perfection

सब कुछ उम्दा हो ये झूठ हमने ही फैलाया है। जैसा चाहो वैसा सच हो ये बुद्धि की माया है। देखोगे जब मुड़कर अपनी ही कहानी तुम सब ठीक ही लगेगा ये वक्त की छाया है। खुद को करोगे बेवजह परेशान हमेशा कहने से ये किसी को कहाँ समझ आया है। ऐसी ऊँची नीची ज़िंदगी चलती है सबकी चाहे हो कोई बुद्ध या बुद्ध की छाया है। छोटे छोटे कदमों से बनते हैं रास्ते धीरे धीरे इसी समझ को मैंने ज़िंदगी में अपनाया है। - शिनाख्त 

My hindsight belief or truth

My core belief is that ....that there is perfect study conditions...perfect mood ...those toppers are always study...24by7 but it is half truth or better to say my hindsight truth... Small steps taken slowly slowly is the way...

आगे चल

अब उस दौर में आ गए हैं हम, जहाँ मुझे समझने वाले पड़ेंगे कम। जो चल रहे हैं मेरे साथ हमसफ़र, उनके अलावा हम बन गए हैं भ्रम। पिछले बही खाते का हिसाब नहीं संभेलंगा, आगे बढ़ने की जो खा ली है क़सम। दुखी, उदास और रो भी रहा हूँ बीते वक़्त पर, आने वाले वक़्त को लाने निकले हैं हम। मैं हर किसी के हाल पर दुखी हूँ, अपने हाल पर गिनने पड़ते हैं ग़म। ख़ैर, इन बातों का क्या सोचना, सोचो थोड़ी देर और भुला दो सनम। - शिनाख्त 

Self belief/ hope / ummed/ motivation

I know times are tough...bandi bhi nhi hai...running out of love ...the days sometimes feels boring and torturous ... sometimes you feel like you are not moving anything just running in circle... But bro have belief...trust the process and one day you will get all you want.It will not waste and you will win ...have hope ...ummed rakh umeed na chod 

No mood/ no mann

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ये दुनिया

दुनिया में कीमत है बस काम की  न बड़े चेहरे, न ही बड़े नाम की  ये चेहरा, ये बाल , ये जिस्म, सब ख़ाक बनते हैं, आए बात जब शाम की। कितनी रातें जागकर काली की तूने, या कितनी गुज़री रातें आराम की। इतनी छाँव चाहिए तुझे मुफ़्त में, देख पहले कितनी गर्मी झेली है घाम की। ये दुनिया क्या देख पाएगी मेरा हौसला, ये देगी मुझे इक्कीस तोपें सलाम की। मैं ख़ुद्दार ही पैदा हुआ हूँ, तोड़ी नहीं रोटी कभी हराम की। ये ख़त मेरे लिए है अभी तो, ये मरने के बाद बनेगी आवाज़ अवाम की। काम के अलावा किसी चीज़ की क़द्र नहीं, यही बात है सार मेरे इस पैग़ाम की। - शिनाख्त 

क्या पता ?

ये ज़िंदगी ही गुजरेगी काम में क्या  वक्त निकल जाएगा इम्तिहाँ में क्या मैं घिस जाऊंगा अपना वक्त लाने में या उम्र जलेगी किताबों की दुकान में क्या क्या इसी तरह घिसूंगा ज़िंदगी भर निकलेगा मेरी मेहनत का अंजाम ही क्या क्या बचेगी ज़िंदगी नाम से अलग या बचेगा ज़िंदगी में नाम ही क्या काम से फुर्सत हो तो मिलूँ आपसे लगता रहेगा मुझपे ये इल्ज़ाम ही क्या क्या आयेगा मेरे हिस्से कुछ अच्छा या इसी तरह रहूंगा मैं बदनाम ही क्या देख पाऊँगा चीज़ों को फिर नए सिरे से या यूँही होता रहूंगा हैरान ही क्या - शिनाख्त

भविष्य

आँखें उठाकर देखूं जिधर भी  लोग बिकते, बिकते हैं घर भी झुका है सर मेरा सबके आगे एक दिन झुकेंगे सबके सर भी  कदम लड़खड़ाए हैं अभी तो क्या  साँसें कांपेगी और लगेगा डर भी अभी कोई नहीं उठता मेरे नाम से उठेंगे लोग क्या ,उठेंगे दर भी मुझसे दूरी बनाकर रखो तुम  वरना होगी बेवजह फिकर भी रखा है खुदको संभाल कर मैंने  जैसे रखते हैं दिल में सबर भी  - शिनाख्त 

काम ही काम

तन्हाई का कैसा आलम बिखरा है, क्या पता कब चाँद निकला है। कट रही है ज़िंदगी गुमनामी में, ये मेरी अधूरी ग़ज़ल का मिसरा है। मैं काम में मसरूफ़ हूँ इस क़दर, मेरे घर में दिल का सामान बिक रहा है। कभी-कभी याद भी आती है, पर दिल मेरा न जाने कहाँ निकला है। वैसे तो जिस्मानी ज़रूरत की भी बात है यहाँ, पर अब मेरा मन कहीं और ही फिसला है। क़ीमत चुकानी पड़ती है नाम की,इश्क़ गँवा कर, यहाँ कब कोई मेरे लिए मरा है। अब जैसे हालात में खड़ा हूँ अभी, मेरा सूरज काम ख़त्म करके ही निकला है। - शिनाख्त 

Family relations or problems

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हमें तो अपनो ने लूटा, ग़ैरों में कहां दम था  मेरी तो कश्ती भी डूबी वहां, जहां पानी कम था