हुस्न
हुस्न पर जो इतना इतराते हो तुम
कहां से इतना कला दिल लाते हो तुम
कहते हैं सबसे बड़ा नशा है ये हुस्न
जान कर भी क्यूं मुँह लगाते हो तुम
होता है हुस्न बस आँखों के लिए
तो क्यूं इसे सर पर बिठाते हो तुम
गले लगाने के लिए बातें काफी हैं
फिर क्यूं इस ज़हर को गले लगाते हो तुम
होता है ये हुस्न बस आग लगाने को
फिर भी इस खाक से दिल लगाते हो तुम
हम तो देखते खुद को अपनी आंखों से
औरों की नज़र से खुदको आजमाते हो तुम
इसी तरह खुश रह कर काम करते हैं हम
इसी तरह दुखी रहकर खुद को निभाते हो तुम
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