मेरा सच
सब कुछ जानता हूं
जो कुछ भी नहीं जानता
जानता हूं खुद को इतना
तो अच्छा भी नहीं मानता
डरता हूँ तो झूठ कहता हूँ
खुद को सच्चा भी नहीं मानता
वैसे तो दिल से बच्चा ही हूं पर
औरों के सामने बच्चा भी नहीं मानता
वैसे तो पकने में देर है मुझे
पर खुद को कच्चा भी नहीं मानता
वैसे तो भिखारी हूँ
इस सफ़र में सख्श के लिए
पर प्यार की भीख के लिए
रस्ता भी नहीं मांगता
क्यूँ समझे मुझे कोई,
क्यूं लगाए कोई दिल
सबको अच्छे से जानता हूँ
तो सबको अच्छा भी नहीं मानता
- शिनाख्त
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